महखाने में बेठे हे और मह को तरसते हे
माहोल हे फूलो का पत्थर से बरसते हे
महखाने में बेठे
दीवानों की नगरी में कुछ यार ही बसते हे
रखते हे तालुक भी आवाज भी कसते हे
माहोल हे फूलो का पत्थर से बरसते हे
महखाने में बेठे
तुम अंजुमनारा हो तुम जानो तो क्या जानो
नागो की तरह लम्हे तन्हाई में डसते हे
माहोल हे फूलो का पत्थर से बरसते हे
महखाने में बेठे
हम एहले जुनू ठहरे हे मोज हमारी तो
कुछ और ही मंजिल हे कुछ और ही रस्ते हे
माहोल हे फूलो का पत्थर से बरसते हे
महखाने में बेठे

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