में नज़र से पी रहा हु ये समा बदल ना जाये
ना उठाओ तुम निगाहें कही रात ढल ना जाये
में नज़र से पी रहा हु
अब भी रात कुछ है बाकी न उठा नकाब साकी
तेरा रिन्द गिरते गिरते कही फिर संभल न जाये
में नज़र से पी रहा हु
मेरे ज़िन्दगी के मालिक मेरे दिल पे हाथ रख दे
तेरे आने की खुशी में मेरा दम निकल न जाये
में नज़र से पी रहा हु
मेरे अश्क भी है इसमे जो शराब बन रही है
मेरा जाम छूने वाले तेरा हाथ जल न जाये
में नज़र से पी रहा हु
में बनाते रहूँ नशेमन किसी शाख-ए-गुलसिता पे
कही साथ आशिया के ये चमन भी जल न जाये
में नज़र से पी रहा हु
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